लक्ष्मण रेखा और सीता
रावण रूपी पाप को
जड़ समेत उखाड़ फैंकना हो
निरंकुश और सत्ता पिपासुओं के बीच
राजराज्य की उत्कृष्टता को जनना हो
मर्यादा, पत्नी धर्म और समर्पण की
पराकाष्ठा को जानना हो
तो
जरूरी है
सीता का
लक्ष्मण रेखा को लांघ जाना।
नारी जाति के विरुद्ध
चलाए जो रहे षडयंत्रों के
इस खतरनाक दौर में
हे नारी स्वाभिमान की प्रतीत सीते
तुम्हें कोटि कोटि प्रणाम।
अगर तुम नहीं लांघती
लक्ष्मण रेखा
तो कोई नहीं मनाता
दीपावली और विजय दशमी का पर्व
तुलसी
नहीं रच पाते
रामचरितमानस
कोई दल नहीं लेता
तेरे पति रूपी बैसाखी का सहारा
सत्ता की कुर्सी हथियाने के लिए
श्री राम
राम ही रहते।
आडंबर के आवरण से लेकर
लक्ष्मण रेखाओं की सीमा को
हर युग में
सीता को ही
तोड़ना होगा लांघना होगा
तभी तो परास्त होंगे असुर
तभी तो प्रज्वलित होगा प्रकाश
तभी तो स्थापित होगा धर्म
धर्म जिसकी जय हो
अधर्म जिसका नाश हो।
