Saturday, January 15, 2011

अगर देना चाहते हो




अगर देना ही चाहते हो
तो समय से पहले हुई
बूढी और कमजोर हड्डियों को
दधीची सा बना दो
ताकि उनसे बनाये जा सकें
वह अस्त्र और शस्त्र
जो असुरो पर वज्र सा प्रहार कर सकें
या ऐसा करो
प्यासे अधरों को
अगस्त्य सी प्यास दे दो
जो पी जाये सारा रुका पानी
एक ही घूँट में
और बना सके धरती पर स्वर्ग
अपनी मर्जी का
अगर ये नहीं कर सकते तो
मजदूरी करते छोटे हाथो को
दे जायो वह दिव्य विद्या
जिससे वह मार सकें
तड़का और सुबाहू को
और गिरा सकें मारीच को सो योजन दूर.
अगर सच में कुछ देना चाहते हो
तो सहारे पर टिकी टांगो को
भृगु सा स्वाभिमान दे दो
जो क्षीर सागर में
शेष शैया पर लेटए
श्री हरी पर प्रहार कर सकें।
हमें
मुठी भर अनाज
दो गज सूती कपड़ा
और
हवा में उड़ जाने वाली
टईन का छत नही चाहेये।
यकीन मानो
हमारी जरूरते अब बदल गयी है।

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